ई-बरिस्ता एक ऐसा मंच है जहाँ हम सब किसी भी विषय पर आपस में चर्चा कर सकते हैं...एक सार्थक चर्चा कर सकते हैं. ई-बरिस्ता में एक माह में हम दो विषयों को अपनी चर्चा का केंद्र-बिन्दु बनायेंगे. पहले विषय पर हमारी चर्चा 1 तारीख से 15 तारीख तक और दूसरे विषय पर चर्चा 16 तारीख से 30/31 तारीख तक चला करेगी.

इन विषयों पर आपसे आलेखों की अपेक्षा रहेगी जो सम्बंधित विषय पर गंभीरता से प्रकाश आरोपित करके विषय पर सही राह सभी को दिखा सकेंगे. आप सभी से ये भी अपेक्षा रहेगी कि अपने आलेख भेजने के साथ-साथ आप अपने मित्रों और सहयोगियों से भी सम्बंधित विषय पर आलेखों को प्रेषित करवाएंगे.

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शुक्रवार, 16 दिसंबर 2011

ई-बरिस्ता पर वंदना गुप्ता का आलेख = "सोशल साईट पर प्रतिबन्ध नहीं, उनकी उपयोगिता समझाने की आवश्यकता है"

सरकार की तरफ से सोशल नेटवर्क साईट पर प्रतिबन्ध जैसे कदम उठाये जाने की बात कही गई थी। बरिस्ता में इसी विषय को लेकर आप सुधीजनों के विचार आमंत्रित किये गए हैं....इन विचारों को १६ दिसंबर से ३१ दिसंबर तक प्रकाशित किया जायेगा।


इस बार का विषय है >> ‘‘पूर्ण स्वतन्त्रता प्राप्त इस तरह के माध्यमों पर क्या आंशिक और पूर्णतः प्रतिबन्ध आवश्यक है?’’ और इस विषय पर पहला आलेख प्रस्तुत है प्रसिद्द ब्लॉगर वंदना गुप्ता जी का और इस आलेख का शीर्षक है "सोशल साईट पर प्रतिबन्ध नहीं उनकी उपयोगिता समझाने की आवश्यकता है"



आज वैचारिक क्रांति को सोशल साइट्स ने एक ऐसा मंच प्रदान किया है जिसने बौद्धिक जगत में एक तहलका मचा दिया है. कोई इन्सान, कोई क्षेत्र इससे अछूता नहीं है. सूचना और संचार का एक ऐसा साधन बन गया है जिसमे कहीं कोई प्रतीक्षा नहीं मिनटों में समाचार सारी दुनिया में इस तरह फैलता है कि हर खास-ओ-आम इससे जुड़ना चाहता है.

फेसबुक, ट्विटर, ऑरकुट या ब्लॉग सभी ने अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है और अपना खास योगदान दिया है. आज जब इन सोशल साइट्स का दबदबा इतना बढ़ गया है तब हमारी सरकार इन पर प्रतिबन्ध लगाना चाहती है. ये तो इंसान के मौलिक अधिकारों का हनन है. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबन्ध लगाना तो गलत है ये तो ऐसा हुआ जैसे स्वतंत्रता को हथकड़ी पहना कर कटघरे में खड़ा करना. आखिर क्यों? ये प्रश्न उठना जायज है. इस सन्दर्भ में हमें इसके पक्ष और विपक्ष के दोनों पहलू देखने होंगे तभी हम सही आकलन कर पाएंगे.

आज जागरूकता के क्षेत्र में इन साइट्स ने एक ऐसा स्थान हासिल किया है जिसे नकारा नहीं जा सकता. और इसका ताज़ा उदाहरण मिस्र हो या लीबिया या फिर हमारा देश भारत सब जगह क्रांति को परवान चढाने में इन साइट्स का खास योगदान रहा. सबने अपनी अपनी तरह से बदलाव लाने के लिए योगदान दिया. आज जैसे ही कोई भी नयी जानकारी हो या कोई राजनैतिक या सामाजिक हलचल उसके बारे में सबसे पहले यहाँ सूचना मिल जाती है. यहाँ तक कि कोई भी क्षेत्र हो चाहे सरकारी या गैर सरकारी सब इनसे जुड़े हैं इसका ताज़ा उदाहरण देखिये हमारी सरकार ने ही ट्रैफिक पुलिस द्वारा किये चालान हों या किसी ने कोई नियम भंग किया हो उसके बारे में ताज़ा अपडेट्स यहाँ डाले हैं ताकि कोई भी हो चाहे नेता, मंत्री या संत्री सबको एक समान आँका जाये और उनके खिलाफ उचित कार्यवाही की जा सके और इसका असर भी देखने को मिला. पुलिस ने भी अपनी साईट बनाई है जिस पर जब चाहे कोई भी अपनी शिकायत दर्ज करवा सकता है तो जब ये ऐसे उचित माध्यम हैं कि सबकी हर जरूरत को पूरा करते हैं तो फिर क्यों चाहती है सरकार कि इन पर प्रतिबन्ध लगे ये प्रश्न उठना स्वाभाविक है.

इसके लिए हमें ये देखना होगा कि बेशक इन साइट्स ने लोकप्रियता हासिल कर ली है और खरी भी उतर रही हैं मगर जिस तरह सिक्के के हमेशा दो पहलू होते हैं उसी तरह यहाँ भी हैं. हर अच्छाई के साथ बुराई का चोली दामन का साथ होता है. ऐसे में यहाँ कई बार अश्लील सामग्री मिल जाती है जिससे ख़राब असर होता है या कई बार कुछ नेताओं के बारे में आपत्ति जनक तथ्य डाल दिए जाते हैं या उन्हें अपमानित कर दिया जाता है तो इससे सरकार घबरा गयी है क्योंकि उनके खिलाफ इसका प्रयोग इस तरह हो गया कि ऐसा तो उन्होंने सोचा भी नहीं था तो जब कोई और हल नहीं दिखा तो इन पर ही प्रतिबन्ध लगने का सोचने लगी. इसके अलावा एंटी सोशल एलिमंट्स सक्रिय हो जाते हैं जिससे सूचनाओं का गलत प्रयोग हो जाता है तब घबराहट बढ़ने लगती है मगर जब अंतरजाल के अथाह सागर में आप उतरे हैं तो छोटे- मोटे हिलोर तो आयेंगे ही और उनसे घबरा कर वापस मुड़ना एक तैराक के लिए तो संभव नहीं है वो तो हर हाल में उसे पार करना चाहेगा बस उसे अपना ध्यान अपने लक्ष्य की तरफ रखना होगा.

सरकार चाहती है अश्लीलता पर प्रतिबन्ध लगे ........ये बेशक सही बात है मगर क्या इतना करने से सब सही हो जायेगा? अंतर्जाल की दुनिया तो इन सबसे भरी पड़ी है और कहाँ तक आप किस किस को बचायेंगे और कैसे? सब काम ये साइट्स तो नहीं कर सकती ना. जिसने ऐसी साइट्स पर जाना होगा वो अंतर्जाल के माध्यम से जायेगा और जो कहना होगा वो कहेगा भी तो क्या फायदा सिर्फ इन साइट्स पर ही प्रतिबन्ध लगाने का. उचित है कि हम खुद में बदलाव लायें और समझें कि इन साइट्स की क्या उपयोगिता है और उन्हें सकारात्मक उद्देश्य से प्रयोग करें और अपने बच्चों और जानकारों को इनकी उपयोगिता के बारे में समझाएं ना कि इस तरह के प्रतिबन्ध लगायें क्यूँकि आने वाला वक्त इसी का है जहाँ ना जाने इससे आगे का कितना जहान बिखरा पड़ा है तो आखिर कब तक और कहाँ तक रोक लगायी जा सकेगी ........सामना तो करना ही पड़ेगा. वैसे भी इन साइट्स के संचालकों का कहना सही है यदि हमारे पास कोई सूचना आती है तो हम उस खाते को बंद कर देते हैं मगर पूरी तरह निगरानी करना तो संभव नहीं है. सोचिये जरा जब हम अपने २-३ बच्चों पर निगरानी नहीं रख पाते और उन्हें ऐसी साइट्स देखने से रोक नहीं पाते तो कैसे संभव है कि इस महासागर में कौन क्या लिख रहा है या क्या लगा रहा है कैसे पता लगाना संभव है?

आपसी समझ और सही दिशाबोध करके ही हम एक स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकते हैं. मगर आंशिक या पूर्ण प्रतिबन्ध लगाना किसी भी तरह उचित नहीं है क्यूँकि आने वाला कल इन्ही उपयोगिताओं का है जिनसे मुँह नहीं मोड़ा जा सकता. बदलाव को स्वीकारना ही होगा मगर एक स्वस्थ सोच के साथ. आत्म-नियंत्रण और स्वस्थ मानसिकता ही एक स्वस्थ और उज्ज्वल समाज को बनाने में सहायक हो सकती है ना की आंशिक या पूर्ण प्रतिबन्ध.

वन्दना गुप्ता गृहिणी

http://vandana-zindagi.blogspot.com

http://redrose-vandana.blogspot.com

http://ekprayas-vandana.blogspot.com

12 टिप्‍पणियां:

  1. ्सबसे पहले मेरे ही आलेख को जगह देकर मुझे अनुग्रहित किया उसके लिये हार्दिक आभारी हूँ।

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  2. very good post
    any one who is connected to internet should make it a point to understand the technical part also
    its very easy

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  3. सार्थक पोस्ट के लिये बधाई!

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  4. शुक्रिया @रचना जी,@अनिता जी

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  5. आपके विचारों से सहमति है। पर आपके नाम के साथ गृहिणी शब्‍द क्‍यों लगा हुआ है?

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  6. @ राजेश उत्‍साही जी मूल रूप से तो गृहिणी ही हूँ ना इसलिये अपनी पहचान तो बतानी चाहिये ना वैसे ब्लोग्स के लिंक दिये हैं जो खुद कह रहे हैं कि थोडा बहुत लिखना पढना भी कर लेती हूँ………:):):)

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  7. bat to srkar ki mansikta ki fb ko yh nhi kha apitu is bat pr jor tha ki soniya ji v prdhan mntri ji pr log kyon likh rhe hain kyon ki in ki yhi prmpra rhi hai desh aapatkal jhej chuka hai main bhi bhugt bhogi hoon srkar ek or to yaun shiksha dena chahti hai fir ashlilta ki bat alg kaise hui
    vndna ji bda shrm kiya hai pr maanniy mntri ji ki mnsha bho ujagr krni chahjiye thi ki ve kya chahte hain aakhir desh me srkar hai ya kis prkar ise roka jaye lkshi devi ka chitr bnaya srkar ko kuchh nhi huaa ya hindoonke khilaf koi kuchh bhi likhe kisi ko preshani nhi hoti yh bhi mudda to hona chahiye aakhir is desh ke bhusnkhykon ka bhi koi adhikar hai ya nhi

    vndna ji bdhai v shubhkamnayen

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  8. एक नया सार्थक अभियान बरिस्ता आरम्भ करने और पहला लेख वर्तमान आवश्यकता पर लिखने पर वंदना जी को बधाई आशा है इस मंच की सार्थकता बनी रहेगी

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  9. एक नया सार्थक अभियान बरिस्ता आरम्भ करने और पहला लेख वर्तमान आवश्यकता पर लिखने पर वंदना जी को बधाई आशा है इस मंच की सार्थकता बनी रहेगी

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